*ऐतिहासिक मंगल प्रवेश जुलुस*
*इंदौर !!* आचार्य प्रवर *श्री हस्तीमलजी म.सा.* के सुशिष्य कुशल सेवा मूर्ति,आडा आसन त्यागी *श्री शीतलराज जी म.सा*.का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश *महावीर भवन,इमली बाजार,इंदौर* से श्रमण संघीय सलाहकार *श्री राममुनिजी "निर्भय"* के मंगल पाठ से प्रारम्भ हुआ जो राजबाड़ा,यशवन्त रोड़, जवाहर मार्ग,नरसिह बाजार,मालगंज होता हुआ *जंगमपुरा स्थित पोरवाल पैलेस* पहुँचा।
इसके पूर्व महावीर भवन ट्रस्ट द्वारा समस्त श्रावक- श्राविकाओं के लिये नवकारसी की व्यवस्था की गई !!
मंगल जुलूस में सैकड़ों श्रावक श्राविका नंगे पैर *सामायिक की वेशभूषा* में साथ साथ पैदल चले।
चातुर्मासिक प्रवेश के विभिन्न आडम्बरो से रहित मंगल जुलूस से जिनशासन की प्रभावना हो रही थी।
*जैन एवम जैनेतर जिन्होंने भी जुलूस मार्ग में दर्शन किये श्रद्धा से नतमस्तक हो गए।*
*यह सुनते देखा गया कि ऐसा जुलूस कभी नही देखा जिसमे अपने गुरु के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति सामायिक की वेशभूषा में चलकर की।*
*उज्जैन, धार, निमाड़, दुर्ग, बालाघाट, रायपुर, कोटा, जयपुर, सवाई माधोपुर, टोंक एवं देश के अनेक स्थानों से सेकड़ो श्रद्धालु उपस्थित हुए।*
*जुलूस में महिला मण्डल के जयकारों ने चार चांद लगा दिए।*
*इस मंगल जुलूस में विशेष बात ये रही कि समस्त श्रावक वर्ग सामायिक की वेशभूषा में नंगे पैर( बिना चरणपादुका के) चल रहे थे साथ ही श्राविका वर्ग भी मुँह पर मुहपत्ति बाँधकर नंगे पैर ( बिना चरणपादुका के) चल रही थी !! जुलूस प्रारंभ होने के पूर्व महावीर भवन पर सभी की चरण पादुका एकत्रित कर जुलुस समापन के पश्चात समस्त श्रावक श्राविकाओं की चरण पादुका पोरवाल पैलेस जंगमपुरा पर स्वाध्याय शाला के कार्यकर्ताओं द्वारा बड़े ही सुनियोजित ढंग से वितरित की गई जिसकी सभी के द्वारा प्रशंसा की गई
*पूज्य श्री शीतल राज जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन को उच्च ओर आदर्श बनाना है तो विवेक(यतना) पूर्वक जिये। ज्ञान,दर्शन, चारित्र और तप का आलम्बन लेकर सामायिक स्वाध्याय को दैनिक उपयोग में लाये।*
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